अगर मिली जिंदगी
तो तुम्हें प्यार करूँगा
उतार दूँगा तुम्हारे सदियों के उधार
चुरा ले आऊँगा
तुम्हारे लिए
इन्द्र के बगीचे से पारिजात
कि अभी थोड़ा सा धीरज धरो
कि नगर में आये हैं तथागत
कर आऊँ उनका दर्शन
इस बार नहीं फँसूगा उनके मुखमण्डल की आभा में
तुषित स्वर्ग भी जाना नहीं है मुझे
नहीं पगलाऊँगा मुक्ति के पीछे
कि अभी शामिल होना है
निःशब्द जाते जुलूसों में मुझे
हारे हुए लोगों के
लाठी चार्ज से लौटे सूजी पीठ लिए
अपनी मछलियाँ अपने पान-फूल
अपनी नदी अपना पेड़ बचाने के विरोध में
शामिल होना है मुझे
अपने छोटे भाइयों के शवदाह में
वो खूबसूरत और बहादुर लोग
हमेशा की तरह इस बार भी मारे गये हैं
एनकाउंटर में
चोर उचक्के डाकू कहकर
सिर पर आकांक्षाओं की गठरी लादे
दमकती आत्माओं वाली
स्त्रियों के गोल के संग संग जाना है मुझे
प्रजातंत्र की रैली में
और शायद लौट आऊँ घर तक सकुशल
सरपट दौड़ाये जा रहे
शाही घोड़ों और पीतल जड़ी लाठियों से बचकर
बचना इसलिए है कि तुम्हें करना है प्यार
तुम्हारे लिए बचाए रखनी है पारिजात की खुशबू
थोड़ी सी बचाये रखनी है आग
बार बार मार खाकर लड़ते जाने की जिद
बचाये रखनी है
कि ऐसे ही छोटी छोटी लड़ाइयों में हारे हुए लोग
बदल देते हैं लड़ाई के तौर तरीके
बदल देते हैं सत्ता का व्याकरण
कि तब तक तुम बचाकर रखना धैर्य
मंै बचाए रखूँगा पारिजात की खुशबू
तो तुम्हें प्यार करूँगा
उतार दूँगा तुम्हारे सदियों के उधार
चुरा ले आऊँगा
तुम्हारे लिए
इन्द्र के बगीचे से पारिजात
कि अभी थोड़ा सा धीरज धरो
कि नगर में आये हैं तथागत
कर आऊँ उनका दर्शन
इस बार नहीं फँसूगा उनके मुखमण्डल की आभा में
तुषित स्वर्ग भी जाना नहीं है मुझे
नहीं पगलाऊँगा मुक्ति के पीछे
कि अभी शामिल होना है
निःशब्द जाते जुलूसों में मुझे
हारे हुए लोगों के
लाठी चार्ज से लौटे सूजी पीठ लिए
अपनी मछलियाँ अपने पान-फूल
अपनी नदी अपना पेड़ बचाने के विरोध में
शामिल होना है मुझे
अपने छोटे भाइयों के शवदाह में
वो खूबसूरत और बहादुर लोग
हमेशा की तरह इस बार भी मारे गये हैं
एनकाउंटर में
चोर उचक्के डाकू कहकर
सिर पर आकांक्षाओं की गठरी लादे
दमकती आत्माओं वाली
स्त्रियों के गोल के संग संग जाना है मुझे
प्रजातंत्र की रैली में
और शायद लौट आऊँ घर तक सकुशल
सरपट दौड़ाये जा रहे
शाही घोड़ों और पीतल जड़ी लाठियों से बचकर
बचना इसलिए है कि तुम्हें करना है प्यार
तुम्हारे लिए बचाए रखनी है पारिजात की खुशबू
थोड़ी सी बचाये रखनी है आग
बार बार मार खाकर लड़ते जाने की जिद
बचाये रखनी है
कि ऐसे ही छोटी छोटी लड़ाइयों में हारे हुए लोग
बदल देते हैं लड़ाई के तौर तरीके
बदल देते हैं सत्ता का व्याकरण
कि तब तक तुम बचाकर रखना धैर्य
मंै बचाए रखूँगा पारिजात की खुशबू